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Parent Blog: गली-गली में चर्चा है ज्ञानकृति के ज्ञान की

श्रीमती दीपा श्रीवास्तव, श्रेयांश की माता, द्वारा रचित दो कविताएँ। उनका यह मानना है कि ज्ञानकृति के साथ हँसता, खेलता, बढता, समझता और हर कुछ जानने की कोशिश करता है बचपन।

गली-गली में चर्चा है ज्ञानकृति के ज्ञान की
अजब अनूठे और अनोखे ज्ञानकृति के ज्ञान की
अक्षय सर की सूझबूझ की
योगराज की गहराई की
बच्चों को जो हंसाती, रचना की उस मुस्कान की
गली-गली में चर्चा है ज्ञानकृति के ज्ञान की

खेल-खेल में पाते शिक्षा बच्चे यहाँ संस्कार की
व्यवहारों से सीख रहे शिक्षा गणित विज्ञान की
गली-गली में चर्चा है ज्ञानकृति के ज्ञान की

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बच्चे पढ़ ही नहीं रहे, सीख रहे है
क्योंकि वे ज्ञानकृति में पढ़ रहे है
बच्चे स्वछंद आकाश में उड़ रहे है
सीमाओं से परे अपना जीवन जी रहे है

बच्चे रेत-मिटटी में खेल रहे है
प्रकृति में रहकर प्रकृति से कुछ सीख रहे है
बच्चे सब्जी बो रहे है, काट रहे है, बना रहे है
जीवन जीने की हर कला सीख रहे है

बच्चे दौड़ रहे है, सूर्य नमस्कार कर रहे है
वे बढ़ ही नहीं रहे, बड़ा बन रहे है
परीक्षा, पास-फेल, प्रथम-द्वितीय इस सब से परे
बच्चे अपने-अपने व्यक्तित्व और कौशल को निखार रहे है
क्योंकि वे ज्ञानकृति में पढ़ रहे है
बच्चे कुछ अच्छा-अलग कर रहे है

“श्रेयांश बढ़ रहा है, पढ़ रहा है
सीख रहा है, बड़ा बन रहा है”