Handling a fussy eater | खाने की आदतो के बारे मे कुछ सुझाव

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Many parents have complained/informed about eating habits of their children. Here are some suggestion:

Handling a fussy eater
A fussy eater is no freak. Fussy eating is perfectly normal, especially for children. As children experiment with food, they develop preferences just like adults. The solution is to offer a wider variety of foods so that they are more likely to choose favourites across food groups. Variety also provides different vitamins and minerals. Don’t stress out if your child refuses to eat bananas. Just look for other foods which contain similar nutrients.

Try to improve your child’s appetite by increasing her physical activity. A hungry child is less likely to be fussy about food. Health drinks and vitamin supplements are not the only solution for fussy eaters. Try to meet your child’s nutritional needs as you would meet your own.

My son refuses to drink milk
“My son refuses to drink milk. It seems to me that all children readily accept milk- based beverages. But my 5-year-old son absolutely refuses to have milk with or without a nutritional supplement. I’m worried that he will lose out on vital nutrients.” – A concerned father

A balanced diet has the most ‘vital nutrients’. So if your child is getting a healthy mix of foods, with portions of staples, proteins and vegetables, you need not worry about his milk aversion. Dairy products are an important source of calcium and minerals, but can be found in milk products as well. Introduce him to curd, flavoured yoghurt, paneer, cheese and ice-cream which will provide him calcium. Other foods rich in calcium include leafy greens, almonds and dry fruits. Health drinks are good but not indispensable. Just focus on healthy eating habits, and don’t worry about the milk. You could reintroduce it after a few months. Alternatively, try flavoured milk. If your child develops a taste for it, you can slowly shift to flavoured health drinks. Try getting a friend, teacher or relative to convince your child to drink milk every day. Sometimes, children are more open to suggestions from people other than their parents.

कई अभिभावकों ने अपने बच्चों की खाने की आदतों के बारे में शिकायत/सूचना दी है।  यहाँ कुछ सुझाव हैं :

खाना खाने में नखरे करना एकदम सामान्य है, खासकर बच्चों के लिए।  क्योकि बच्चे भोजन के साथ प्रयोग करते हैं, वे अपनी पसंद बनाने लगते हैं  बिलकुल बड़ों की तरह। समाधान यह है कि भोजन की व्यापक विविधता पेश की जाए ताकि उन्हें चयन करने के लिए अधिक संभावनाएं प्राप्त हो।  विविधता से उन्हें भिन्न भिन्न प्रकार के विटामिन व खनिज भी मिलते हैं।यदि आपका बच्चा केला खाने से मना करता है तो चिंता मत कीजिये।  उसे कुछ और दीजिये जिसमे सामान प्रकार के पौष्टिक तत्व हों।

बच्चे की भूख बढ़ाने के लिए उसकी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं।  अगर बच्चा भूखा होगा तो वह भोजन के लिए कम नखरे करेगा। कृत्रिम पेय पदार्थ और विटामिन के पूरक ही एकमात्र समाधान नहीं है।  अपने बच्चे के पोषण सम्बंधित जरूरतों को ऐसे ही पूरा कीजिये जैसे आप अपनी करते हैं।

मेरा बच्चा दूध पीने से मना करता है
“मेरा बेटा दूध पीने से मना करता है।  ऐसा लगता है कि सभी बच्चे दूध के उत्पादों को ख़ुशी से स्वीकारते हैं।  किन्तु मेरा ५ वर्षीय बेटा दूध बिलकुल नहीं पीता। वह सादा दूध या पौष्टिक पूरक मिला कर दोनों के लिए ही मना करता है।” – एक चिंतित पिता

एक संतुलित आहार में महत्वपूर्ण ‘पौष्टिक तत्व’ होते हैं।  तो यदि आपका बच्चा पौष्टिक भोजन, प्रोटीन और सब्जियां खा रहा है तो आपको दूध के बारे में चिंता करने की जरुरत नहीं है। डेयरी उत्पादों में महत्वपूर्ण केल्शियम और खनिज होते हैं, किन्तु वे दूध के उत्पादों में भी पाये जाते हैं।  उसे दही, फ्लेवर वाला मट्ठा, पनीर और आइस-क्रीम दीजिये, इनसे भी उसे कैल्शियम प्राप्त होगा।  अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों में हरी पत्ते वाली सब्जियां, बादाम और सूखे मेवे सम्मिलित हैं।  हेल्थ पदार्थ अच्छे हैं किन्तु अनिवार्य नहीं हैं।  बस स्वस्थ खाने की आदतों पर ध्यान दीजिये, दूध की चिंता मत कीजिये।  आप उसे कुछ महीनों बाद वापस देने की कोशिश कर सकते हैं। एक विकल्प यह है कि फ्लेवर वाला दूध देने की कोशिश कीजिये।  यदि आपके बच्चे को वह  स्वाद अच्छा लग जाता है तो धीरे से फ्लेवर वाले हेल्थ ड्रिंक देना शुरू कर सकते हैं। उसे प्रतिदिन दूध पीने के लिए समझाने के लिए किसी दोस्त, शिक्षक या रिश्तेदार की मदद भी ले सकते हैं। कभी कभी बच्चे उनके माता-पिता से ज्यादा किसी और के सुझावों को सही मानते है|

रचना सक्सेना द्वारा हिंदी में अनुवाद किया गया|

नोट: लेखक ज्ञानकृति के संस्थापक एवं निदेशक है| यहाँ व्यक्त किये गए विचार व्यक्तिगत हैं।

Note: The author is Founder-Director of Gyankriti. The views expressed here are personal.