बच्चों को खिलोनों का महत्त्व समझाये

“मेरी बेटी के पास बहुत सारे खिलौने हैं, किन्तु वह उनका महत्त्व नहीं समझती।”- विद्या गौर, जो एक सात साल की बच्ची की माँ हैं | विद्या खुद दो तीन खिलौनों के साथ बड़ी हुयी, और हर साल जन्मदिन पर एक नया खिलौना उनमे जुड़ जाता था ।आजकल के सुविधायुक्त जीवन में बच्चे टोकरी भर खिलौनों के साथ बड़े होते हैं, और बहुत मुश्किल है उन्हें यह समझाना कि भारत के 4 करोड़ 80 लाख में से अधिकतम बच्चों के लिए ये खिलौने कितने अनमोल हैं।

“मुझे कोई चिंता नहीं अगर मेरा खिलौना टूट जाता है, मुझे नया मिल जायेगा।” यह कहना है 6 साल के रिषभ वर्मा का। उसे नहीं पता कि उसके माता पिता को ऐसे कथन क्यों पसंद नहीं। रिषभ की ही तरह अनेक मध्यम वर्गीय बच्चे परवाह नहीं करते यदि उनके खिलौने गुम हो जाये या टूट जाये, क्योकि उन्हें पता है कि उन्हें दूसरे मिल जायेंगे।

यहाँ कुछ तरीके है जिससे बच्चों को वस्तुओं का महत्त्व समझाने में मदद होगी –

जरूरतमंद लोगों को बांटना

उनका ध्यान उन बच्चों की तरफ आकर्षित करें जो इन सुख सुविधाओं से वंचित हैं। समझाईये कि वे कम कपड़े व भोजन और बिना खिलौनों के साथ कैसे जीते हैं। अपने बच्चों से कहिये कि वे उन भोजन, कपड़े और खिलौनों के पैकेट बनाये जो उनके लिए पुराने हो गए हैं। उनकी पसंद आपसे अलग हो सकती है, किन्तु उन्हें स्वीकारने के लिए तैयार रहें।एक उपयुक्त परिवार को ढूंढे जिसे यह पैकेट दे सकें। ये परिवार निर्माण करने वाले मजदूर जो टेंट में रहते हैं या फिर आपके नौकर भी हो सकते हैं। हांलाकि बच्चों को यह समझाना भी आवश्यक है कि जब वे समाज के दूसरे तबके के लोगों से मिलें तो बहुत ज्यादा दया, घृणा या नम्रता न दिखाएँ। साथ में जाईये और उन्हें वो पैकेट दीजिये। चैरिटी करने से आपके बच्चे को एहसास होगा कि कम सुविधाओं वाले बच्चों के लिए ये कपड़े और खिलौने कितने मूल्यवान हैं और साथ ही उन्हें चैरिटी का सुखद अनुभव भी होगा।

नई चीजों की जांच करना

जन्मदिन पर ढेर सारे तोहफे मिल जाने पर कुछ तोहफे उतने आकर्षक नहीं लगते | इस्तेमाल करने से पहले अपने बच्चे को पहले हर नयी चीज़ को ध्यान से देखने दें।अगर वे कोई ऐसे खिलौने/गेम/पाठ्यसामग्री है जो बच्चे के पास पहले से है, या उसे उसकी आवश्यकता नहीं है, तो वह उसे एक बक्से में सम्हाल कर रख ले। ऐसे तोहफे किसी जरूरतमंद को दे सकते है, तोहफे के रूप में किसी और को दे सकते हैं या बाद में उपयोग में ले सकते हैं|

रीसायकल करना

पुराने खिलौने किसी दूकान या वेबसाइट पर बेचे भी जा सकते हैं। इस तरह बच्चे जागरूक होंगे कि उन चीज़ों को किसी को देकर या बेचकर कुछ समझदारी का कम कर रहे हैं बजाये के घर पर  बिना उपयोग में लाये पड़े हुए हैं। इसके बदले में उन्हें अनुमति दी जा सकती है कि उन्हें जिस चीज़ की आवश्यकता है वो खरीद सकते हैं।

उत्सुकता बढ़ाये

कोई भी नयी वस्तु उपहार में देने से पहले उसके बारे में बच्चे से बात करके या इन्टरनेट पर उससे सम्बंधित सामग्री दिखाकर दिलचस्पी बढ़ाये। एक बार उसकी जिज्ञासा प्रज्वलित हो गयी वो उस वस्तु का महत्त्व समझेगा।

अनुचित प्रयोग को नियंत्रित करें

यदि आपका बच्चा अपने खिलौनों को लेकर लापरवाह है, उन्हें फेंकता है या बिस्तर के नीचे धकेलता है, उनसे वह वापस ले लीजिये। जब तक आपको नहीं लगता कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेगा, खिलौना अपने पास ही रखिये, या किसी को दे दीजिये।जब वह उस खिलौने को गँवा देगा तब वह उसके लिए जरुरत बन जायेगा, हो सकता है वह आपसे वो खिलौना मांग ले इसलिए कुछ देर उसे अपने पास ही रखिये|

नोट: लेखक, योगराज पटेल, ज्ञानकृति के संस्थापक एवं निदेशक है| यहाँ व्यक्त किये गए विचार व्यक्तिगत हैं।

English version: http://www.gyankriti.com/blog/does-your-child-value-her-toys/

रचना सक्सेना द्वारा अनुवादित |