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The importance of Play | बच्चों को खेलना क्यों चाहिए?

Why should children play?

Simply because play is the work of childhood. Play helps children learn better, retain learning and enjoy the process. Play teaches children to reason, use logic, plan, work with others, sometimes lead, sometimes follow, to win or lose and to shake hands and make up after a contest.

It’s important that children play with appropriate toys and have the option of indoor and outdoor play. Use of battery toys, computer games and video games should not qualify as play as they are harmful in several ways.

  1. Such toys set the agenda for a child. It’s not the child thinking or working out what to do next; it’s the toy that decides.
  2. They tend to reduce social interaction and make children anti-social.
  3. Reduced social interaction impairs the development of communication skills.
  4. Such toys/games can be very addictive.
  5. They could cause obesity, eye and other health problems.

Children have everything to gain when you give them the gift of play. Depriving children of play opportunities could have negative consequences – depression, aggression and hostility.

हिंदी अनुवाद

बच्चों को खेलना क्यों चाहिए? क्योकि खेलना बचपन का अभिन्न अंग है। खेलना बच्चों के सीखने की क्षमता को बढ़ाने, याद रखने और प्रक्रिया का आनंद लेने में मदद करता है। खेलने से बच्चे कई महत्वपूर्ण बातें सीखते हैं, जैसे कारणों को जानना, तर्क का उपयोग करना, योजना बनाना, अन्य लोगों के साथ काम करना, कभी नेतृत्व करना, कभी पालन करना, जीतना या हारना और हाथ मिलाना एवं प्रतियोगिता के बाद एक हो जाना।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बच्चे उपयुक्त खिलौनों से खेलें एवं उनके पास घर के अंदर व् बाहर खेलने का विकल्प हो। बैटरी चलित खिलौनों का प्रयोग, कंप्यूटर गेम्स एवं वीडियो गेम्स खेल की श्रेणी में नहीं आना चाहिए  क्योकि वे बच्चों के लिए कई मायनों में हानिकारक हैं।

  1. ऐसे खिलौने बच्चों के लिए कार्यसूची बना देते हैं। इसमें बच्चे खुद से कुछ नहीं सोच रहे होते हैं, ना ही वे आगे की कार्यप्रणाली बनाते हैं, ये निर्णय खिलौने लेते हैं।
  2. वे सामाजिक संवाद कम करते हैं, व् बच्चों को असामाजिक बनाते हैं।
  3. सामाजिक संवाद की कमी बच्चों के संचार कौशल को बाधित करती है।
  4. ऐसे खिलौने/गेम्स बच्चों की लत बन सकते हैं।
  5. वे मोटापे, आँख व् अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित परेशानियों का भी कारण बन सकते हैं।

जब आप बच्चों को खेलने की स्वतंत्रता देते हैं तो वे सब कुछ सीख लेते हैं। अवसाद, आक्रामकता और शत्रुता – खेलने के अवसरों से वंचित बच्चों के नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

रचना सक्सेना द्वारा हिंदी में अनुवाद किया गया|

नोट: लेखक ज्ञानकृति के संस्थापक एवं निदेशक है| यहाँ व्यक्त किये गए विचार व्यक्तिगत हैं।

Note: The author is Founder-Director of Gyankriti. The views expressed here are personal.