सही विद्यालय का चुनाव


एक देश के विकास और सम्पन्नता के लिए सशक्त संरचना की आवश्यकता होती है। यह संरचना मात्र सड़क और रेलवे नहीं अपितु शिक्षण संस्थान भी हैं। एक विद्यालय किसी भी शिक्षण प्रणाली का आधार है। विद्यालय मात्र अच्छी शिक्षा प्रदान करने का ही उत्तरदायी नहीं है अपितु ऐसे युवाओं की रचना करने में भी योगदान देता है जो देश की सेवा कर सकें। इसलिए विद्यालय का चुनाव करते समय केवल संरचना पर ही नहीं इन बिंदुओं पर भी ध्यान दें -

  • कार्यप्रणाली: कार्यप्रणाली ऐसी होना चाहिए जिसमे संवेदना हो कि “कोई भी कार्य छोटा या अशिष्ट नहीं है”
  • संस्थापकों की नियमित और सीधी सहभागिता: संस्थापक जो विद्यालय की दृष्टी सामने लाते हैं, उन्हें उस तंत्र को बनाने के लिए भी सीधा सहभागी बनना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट का “फ्रेंचाइजी नहीं है” पृष्ठ पढ़ें
  • भविष्य के मार्गदर्शक: एक ऐसी स्थायी प्रणाली बनाने पर ध्यान देना चाहिए जो किसी भी व्यक्ति विशेष पर निर्भर ना हो चाहे वो संस्थापक हो, प्रबंधक या शिक्षक
  • व्यवहारिक कौशल का विकास: शिक्षा किताबी ज्ञान मात्र नहीं बल्कि विभिन्न व्यवहारिक तथ्यों का ज्ञान और उनका सामना करने का कौशल है
  • नैतिक शिक्षा: कोई भी व्यक्ति, चाहे वो कितना भी शिक्षित हो, देश की सेवा तभी कर सकता है जब वो अपने कार्य को नैतिकता और सदाचार से करता है
  • परिश्रम और प्रतिनिधित्व करने का आत्मविश्वास: कोई भी कठिनाई मुक्त जीवन का विश्वास नहीं दिला सकता। प्रत्येक व्यक्ति को अस्तित्व और प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष करना पड़ता है। संघर्ष भरे जीवन को स्वीकारने की क्षमता आत्मविश्वास और कभी हार ना मानने की प्रवत्ति प्रदान करती है। बच्चों को पढ़ाई, खेल, क्रियाकलाप इत्यादि के समय इस तरह की विभिन्न अवस्थाओं का सामना करा कर यह आत्मविश्वास अर्जित किया जा सकता है
  • खुद से सीखना और ज्ञान का अद्यतीकरण करना: वास्तविक जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को कई चीज़े सीखनी होती है, कुछ पुराने तरीकों को त्याग कर कुछ चीज़े फिर से सीखनी होती है। यह विकास की निरन्तर प्रक्रिया है और एक विद्यालय को इन कौशल को बढ़ावा देना चाहिए
  • सामाजिक और भावनात्मक कौशल: क्योकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, उसे व्यवहार करना, धैर्य रखना, सराहना, बुद्धि का विस्तार करना, विचारों की स्पष्टता सीखना पड़ती है। यह कौशल पाठ्यक्रम का आधार होना चाहिए।