मूल सिद्धांत


  • १००%  सहभागिता: ज्ञानकृति सभी मुख्य कार्यक्रमों में सभी कर्मचारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों व अभिभावकों से १००% सहभागिता को प्रोत्साहित व प्रेरित करती है हम उन्हें प्रशस्ति देते हैं जिनकी किसी विशेष माह में १००% उपस्थिति रही हो।
  • भविष्य के नागरिक: विद्यालय शिक्षा का उद्देश्य ऐसे युवा प्रदान करना होना चाहिए जो राष्ट्र व मानवता के लिए बिना किसी पक्षपात के सेवा करें। इसका उल्लेख ज्ञानकृति के ध्येय वचन में भी किया गया है - “अपने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, खुली विचारधारा एवं स्वतंत्र सोच का संचार करना।”
  • अभिभावकों की सहभागिता: ज्ञानकृति का मानना है कि अभिभावक संप्रदाय लगातार बदलती परिस्थिति के निर्माण मे सहभागी है। हमने अभिभावकों को सहभागी बनाने व उनसे लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए अनेक प्रकार के यंत्रों को बनाया है, इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ‘पालकों का योगदान' पृष्ठ पढ़ सकते हैं।
  • व्यवहारिक कौशल: व्यवहारिक कौशल ज्ञानकृति का मूल है। कक्षा के ज्ञान के साथ साथ इस तरह के कौशल बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। मुक्त कक्षाओं के सत्र, ब्लॉक रूम क्रियाकलाप, शैक्षिक भ्रमण इत्यादि व्यावहारिक शिक्षा के लिए आवश्यक दिशा प्रदान करते हैं।
  • सशक्त सुरक्षा मानक: ज्ञानकृति प्रांगण के भीतर व बाहर सुरक्षा के कठोर मानदंडों का पालन करती है। छोटे बच्चों के मामले में अभिभावकों से भी दृढ़ता से अमल करने की अपेक्षा की जाती है। उल्लंघन करने पर गंभीर कार्यवाही की जा सकती है, जिसके अंतर्गत विद्यालय से निष्कासित किया जा सकता है।
  • समयपालन व नियमितता: सभी ज्ञानकृति सदस्य चाहे अभिभावक हों, विद्यार्थी या शिक्षक समय का सम्मान करते है एवं गौरवान्वित महसूस करते हैं जब हम सभी कार्यक्रम और नियमित विद्यालय का समय पर आरम्भ व समापन करते हैं। इस तरह का सख्त समयपालन सभी सदस्यों पर लागू होता है। किसी भी कौशल की वृद्धि के लिए नियमितता व अभ्यास अति आवश्यक है, इसलिए ज्ञानकृति इसपर अधिक दबाव देती है।
  • निजी अध्यापन नीति: ज्ञानकृति निजी अध्यापन (ट्यूशन) की स्वीकृति नहीं देती है, क्योकि वह बच्चों के लिए एक अवलंब की तरह ही कार्य करता है। यदि अभिभावक को लगता है कि उनके बच्चे को विशेष सहायता की आवश्यकता है तो उन्हें विद्यालय में संपर्क करना चाहिए। जो विद्यार्थी ट्यूशन जाते हैं वे सोचते हैं कि गृहकार्य और अध्ययन उनकी ट्यूशन शिक्षिका का उत्तरदायित्व है,; साथ ही वे स्वतंत्र अध्ययन और खुद से पढ़ने के कौशल का विकास करने में असमर्थ होते हैं। विद्यार्थियों को भविष्य में समस्या आती है जब उन्हें अकेले ही अध्ययन करना होता है। उसी प्रकार शिक्षिकाओं को भी ट्यूशन लेने की अनुमति नहीं है चाहे वो ज्ञानकृति के विद्यार्थी हों या कोई और।
  • भाषा नीति: विद्यालय में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी है, हांलाकि, जहाँ अभिव्यक्ति का महत्व भाषा से अधिक है वहां हम मातृ भाषा (उन बच्चों के लिए जिनकी मातृ भाषा अंग्रेजी नहीं है) को प्रोत्साहित करते हैं। अतः विद्यालय कक्षा में बच्चों द्वारा व् कभी-कभी शिक्षिकाओं द्वारा भाषाओँ के उचित मिश्रण में विश्वास रखता है, विशेषकर शुरुआती वर्षों में जब अधिकतर बच्चों के लिए अंग्रेजी नई भाषा होती है। बचपन के प्रथम कुछ वर्ष बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।