स्कूल के तीन स्तम्भ


पालक - शिक्षक - स्कूल
हम उत्तम व अनुभवी शिक्षकों की सहायता लेते हैं किन्तु परिणाम माता पिता के सहयोग पर भी अत्यधिक निर्भर करता है| हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं कि अपने प्राणप्रिय बच्चे को किसी के पास छोड़ने के लिए बहुत साहस की आवश्यकता होती है, किन्तु सही समय पर लिया गया सही निर्णय आपके बच्चे के लिए हितकारी होगा।  बच्चे अधिक समय अपने घर पर व्यतीत करते हैं इसलिए यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि इन तीनों स्तम्भों का संयोजन बच्चे के मानसिक विकास के लिए सुरक्षित, स्वस्थ व शक्तिशाली वातावरण प्रदान करता है|

इन तीनो स्तम्भों के संयोजन को यथार्थ करने हेतु ज्ञानकृति ने कुछ कदम इस ओर बढ़ाये हैं :

    1. ऑनलाइन पैरेंट पोर्टल: हम सम्प्पूर्ण पाठ्यक्रम और अतिरिक्त संसाधन हमारे पैरेंट पोर्टल मूडल पर अपलोड करते हैं। सभी आवश्यक समाचार और अपडेट पोर्टल और ई-मेल नोटिफिकेशन के माध्यम से आसानी से उपलब्ध है।
    2. ओपन हाऊस शनिवार: हर माह का दूसरा व चौथा शनिवार ओपन हॉउस होता है। ओपन हॉउस में अभिभावक शिक्षकों से मिल सकते हैं और अपने शिशु की प्रगति के बारे में चर्चा कर सकते हैं। इन सत्रों के दौरान हम अपनी शिक्षण पद्धति भी साझा करते है ताकि माता-पिता घर पर प्रभावी ढंग से अपने बच्चे की मदद कर सकें।
    3. घर का दौरा: हर शैक्षिक सत्र के आरम्भ में शिक्षिका १५-२० मिनट के लिए हर विद्यार्थी के घर जाती है। इस प्रक्रिया द्वारा जो बंधन बनता है और शिक्षिका को बच्चे और उसकी पृष्ठभूमि के विविध पहलूओं के बारे में जो जानकारी मिलती है वह बहुत महत्वपूर्ण है। इससे शिक्षिका को बच्चे के जीवन में एक पालक की तरह कर्तव्य निभाने में सहायता मिलती है जिससे बच्चे के सम्पूर्ण विकास की प्रक्रिया सुगम बनती है।
    4. अभिभावक - शिक्षक सम्मेलन: हर छह माह में एक अनिवार्य ”अभिभावक - शिक्षक सम्मेलन” का आयोजन किया जाता है| इस सम्मलेन में एक विस्तृत आकलन रिपोर्ट कार्ड भी दिया जाता है।